The happiness hypothesis book summary in hindi ( खुश रहना सिखिए रहे)

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The happiness hypothesis book summary in hindi ( खुश कैसे रहे) –अमेरिकन सोशल साइकोलॉजिस्ट Jonathan Haidt की The happiness hypothesis एक ऐसी साइकोलॉजी बुक है जो हमारे past के सबसे महान थिंकर्स के ideas को साइंस की मदद से टेस्ट करती है और उनकी wisdom को असानी से समझ आने वाले 10 प्रैक्टिकल ideas में devide कर के हमें ये बताती है कि happiness कैसे हासिल करी जाती है।

कई लोग अपनी ज़िन्दगी में ख़ुशी और मीनिंग ढूंढ पाते हैं और कई नहीं ढूंढ पाते। वो कौन सी चीजें होती हैं जो हमें happy और fulfill फील कराती हैं। लोगों ने इन प्रश्न का उत्तर पैसा, खाना, भगवान और ना जाने कौन कौन सी जगहों में ढूंढा है और तभी हमारी ज़िन्दगी काफी आसान बन सकती है अगर हमें ये पता चल जाए कि दूसरे लोगों के लिए खुश रहने के लिए कौन सा तरीका काम करता और कौन सा नहीं।

तभी इस article The happiness hypothesis book summary in hindi ( खुश कैसे रहे) मे हम इस book के 10 chapter को discuss करेंगे।

The happiness hypothesis book summary in hindi

The happiness hypothesis book summary in hindi  ( खुश कैसे रहे )

chapter 1.  The divided self

सबसे पहले चैप्टर में जॉनथन ने बताया है कि हमारा mind कई अलग पार्ट्स में डिवाइडेड होता है और सबसे ज़रूरी division होता है हमारे दिमाग में चलने वाले concious vs automatic प्रोसेसेस का जो कई बार एक दूसरे को अपोज करते हैं।

जैसे जब भी आप कोई goal सेट करते हो तब आप शुरू में बहुत motiveted होते हो पर धीरे धीरे आप उसे भूल ही जाते हो। ये इसलिए क्यूंकि आपका दिमाग एक सिंगल युनिट नहीं है  उसमें मौजूद हर पार्ट आपको एक अलग डायरेक्शन में खींच रहा होता है। Book( The happiness hypothesis) में ये एग्जाम्पल दिया गया है कि जिस तरह से एक rational इंसान एक जंगली हाथी को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा होता है वैसा ही हमारा concious mind लगातार  unconscious mind की मोटिवेशन के साथ नेगोशिएट कर रहा होता है ताकि उसे कुछ पॉजिटिव outcome मिल जाए।

तभी self improvement का गोल है अपने अंदर मौजूद इसी जंगली हाथी यानि इमोशन्स, गट फीलिंग्स या अपने बेसिक मोटिवेशन को ज़बरदस्ती बदलने के बजाए उनके साथ मिलकर काम करना।

जैसे अगर आपके दोस्त ने आपसे ढंग से बात नहीं करी और आप इस वजह से काफी दुखी महसूस कर रहे हो तो उस समय पर आपने अपने rational  माइंड की मदद लेनी है अपने ऑटोमैटिक रियेक्शन को कंट्रोल करने में ताकि आपके माइंड में मौजूद वो जंगली हाथी कुछ गलत कदम ना ले ले। ये एडवाइस काफी ज़रूरी है अपना self control बढाने के लिए और अपनी ओर overthinking  कम करने के लिए।

Chapter 2 –  Changing your mind

ये चैप्टर बताता है कि  हमारी happiness, आउटर circumstenses और हमारे जीन्स की वजह से भी इनफ्लुएंस हो सकती है। हम अपनी happiness को बढ़ा सकते हैं अपनी थिंकिंग और अपने ब्रेन की केमिस्ट्री को चेंज करके यह पॉसिबल हो सकता है तीन तरीकों से।

  • मेडिटेशन – जो हमारे pessimism या नेगेटिव थिंकिंग को optimism में बदल सकता है।
  •  कॉग्निटिव थेरेपी – जो स्टोरी सिस्टम फिलॉसफी के प्रिंसिपल्स पर बेस्ड है और इसमें आप एक बिहेवियरल थेरेपिस्ट से बात करते हो जो आपकी थिंकिंग और बिहेवियर को चेंज करने में मदद करता है। इस टाइप की थेरेपी लोगों की एंजाइटी कम करके उन्हें ज्यादा हैप्पी बनाने में सबसे ज्यादा यूजफुल होती हैं
  •   एक सेरोटोनिन बढाने वाली मेडिकेशन लेना –  अपनी हैप्पीनेस को हेल्दी लेवल्स पर लाने का ये तरीका उन लोगों के लिए बेस्ट होता है जो बहुत ज्यादा स्ट्रेस लेते हैं और इस स्ट्रेस की वजह से उनके दिमाग में फिजिकल चेंजेस आ चुके हैं।

 Chapter 3 – Reciprocity with a vengeance

ज्यादातर जानवरों की लाइफ काफी सोशलाइजेशन से भरी होती है पर बाकी स्पीसीज के बीच हम इन्सान और ultra सोशल कहलाते हैं। यानी हम छोटे छोटे ग्रुप्स में भी रह सकते हैं और बड़ी बड़ी सोसाइटीज में भी यही रीजन है कि क्यों जब हम घर से बाहर निकलते हैं तब पहले से ही सड़कें बनी हुई हैं,स्ट्रीट में लाइट्स हैं और अगर आप एक अनजान इंसान से कोई छोटी मोटी मदद भी मांग लेते हो तो चांसेस हैं कि वो आपको मना नहीं करेगा। यानि हम इंसानों के बीच ये अग्रीमेंट हुआ पड़ा है कि हमें एक दूसरे की मदद करनी है और हम सबसे अलग होकर नहीं रह सकते हैं।

एवोल्यूशन की नजर में ये बिहेवियर सेल्फिश जीन के कॉन्सेप्ट से समझा जाता है। यानी अगर आपने एवोल्यूशन की गेम में जीतना है तो आपने कुछ भी करके अपने जीन्स अगली जेनरेशन में पहुंचाने हैं।

  • आपके बच्चे और आपके भाई बहन आपके साथ 50% जीन्स को शेयर करते हैं।
  •  आपका भांजा भांजी आपके साथ 25% जीन्स शेयर करते हैं
  • आपके cousins आपके साथ 12.5% जीन शेयर करते हैं

एवोल्यूशन की नजर में जितना जोखिम आप अपने आठ कजंस की जिंदगी बचाने में लगाएंगे उतना ही जोखिम आपको अपने दो बच्चों को बचाने में लगाना चाहिए। पर जब हम unknown लोगों को भी अपने बच्चों या भाई बहन जैसा ट्रीट करने लगते हैं तो हमारे एक दूसरे को मदद देने के चांसेस बढ़ जाते हैं। लेकिन कई लोग हमारी इस लेन देन करने की इंस्टिंक्ट का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं और बदले में हमें दुख देकर चले जाते हैं। इसी वजह से हम बोलते हैं जैसे को तैसा इसका मतलब चाहे आपको कोई प्यार दे या फिरधोखा ऐसे प्रोजेक्ट की समझ आपको इमोशनली स्टेबल और फुलफिल रहने में मदद कर सकती है।

Chapter 4 – The fault of others

Ultra सोशल होने की एक और साइड है दूसरों को मैनिपुलेट करना बिना खुद ये जाने कि आप कुछ गलत कर रहे हों। ज्यादातर हम दूसरों के बारे में ये सोचते हैं कि भई इसको अपनी गलती और बेवकूफी क्यों नहीं समझा रही और वो सेम चीज आप के बारे में सोच रहे होते हैं।

पर कहीं न कहीं हमारे अंदर अपनी गलतियों को इग्नोर करने की एक बायस होती है। अगर हमें सीधा सीधा हमारी गलती बताई जाती है तो हम उसे एक्सेप्ट नहीं कर पाते और ये बायस हमारे रिलेशनशिप्स को खराब करता है। इसी वजह से हम अपने कॉग्निटिव बायस को कमजोर बना सकते हैं। consciously  अपनी गलतियों को ढूंढ़ने में एफर्ट लगा के और अपनी उस गलती या कमी को एडमिट करके।

Chapter 5 – The pursuit of happiness

ये एक कॉमन नॉलेज है कि हम खुशी materialistic चीजों में नहीं ढूंढ सकते और खुशी बस हमारे अंदर से ही आती है। पर Jonathan अपनी बुक  The happiness hypothesis मे कहते  है कि एक सुखी लाइफ में कई एक्सटर्नल चीजें भी जरूरी होती है जैसे हम पैसों को कैसे खर्च करते हैं और किस तरह के लोगों के साथ रहते हैं।

यही रीजन है कि क्यों जिन लोगों के सोशल कनेक्शंस ज्यादा नहीं होते या फिर उनके रिलेशंस की क्वॉलिटी बेकार होती है। वह हमेशा दुखी और परेशान रहते हैं। इसके साथ ही आपकी हॉबीज और आपके गोल्स भी आपकी लाइफ सैटिस्फैक्शन को काफी इन्फ्लुएंस करते हैं। स्पेसिफिकली जॉनथन ने बताया है कि पैसा या स्टेटस के पीछे मत भागो बल्कि अपने काम में एक्सिलेंस हासिल करने की कोशिश करो और ऐसा काम करो जिसको करते करते आप flow स्टेट में चले जाते हो। ये वो स्टेट है जो एक चैलेंजिंग पर मैनेजेबल काम को करते हुए आती है।

Chapter 6 – Love and attachments

बचपन से ही दूसरे लोगों से अटैचमेंट्स हमें सिक्योरिटी प्रोवाइड करती आई है। पर जोनाथन के हिसाब से हमें अपनी रोमेंटिक लव की डिजायर पैशनेट लव से नहीं बल्कि कमपैशनेट लव से पूरी करनी चाहिए।

पैशनेट लव वह होता है जो रिलेशनशिप की शुरुआत में बहुत स्ट्रांग होता है पर टाइम के साथ साथ वो प्यार कम हो जाता है। दूसरी तरफ कमपैशनेट लव का मतलब है हर इंसान के लिए ही पॉजिटिव फीलिंग्स रखना और उन्हें प्यार से ट्रीट करना।

इस तरह का प्यार आपको अपने बारे में अच्छा महसूस कराता है क्योंकि आप दूसरों को अच्छा फील कराने होते हो और अपने सोशल कनेक्शंस को मजबूत बना रहे होते हो।

Chapter 7- The use of adversity

इस चैप्टर में Jonathan Haidt कहते है की हमे ये सीखना जरूरी है कि हम मुश्किलों के वज़न के नीचे दबने से कैसे बचें और उसे अपनी ग्रोथ के लिए कैसे यूज करें। रिसर्च बताती है कि यह हमारी सेल्फ इमेज पर डिपेंड करता है।

जैसे जब हमारा पार्टनर हमें रिजेक्ट कर देता है या फिर हमारा बिजनेस फेल हो जाता है तब हम अपने आप को एग्जामिन करने लग जाते हैं कि क्या हमारे में कोई कमी है जिसकी वजह से हमें यह लॉस झेलना पड़ रहा है। ये स्पेशली true है यंग एडल्ट्स के लिए जो लाइफ में मीनिंग और अपनी आइडेंटिटी ढूंढ रहे होते हैं। तो जब भी उनका ब्रेकअप होता है तो उन्हे अपनी पर्सनैलिटी को डेवलप करने का मौका मिल जाता है।

Chapter 8 – The felicity of virtue

इस चैप्टर में उन्होंने ने बुद्ध की एडवाइज शेयर करी है, जिसमें उन्होंने बोला है कि अपना ध्यान अच्छे और नेक काम करने पर लगाओ उन्हें बार बार दोहराएं और तब आपको खुशी मिलेगी। एक नादान इंसान सिर्फ तब तक खुश रहता है जब उसके बुरे काम उसकी ज़िन्दगी को बुरा नहीं बना देते हैं। पर एक अच्छा इंसान सिर्फ तब तक दुखी रहता है जब तक उसकी अच्छाई बाहर नहीं आ जाती।

आज के समय पर ज्यादातर लोगों को शुरू से अच्छाई और बुराई का मतलब तो सिखाया जाता है पर उन्हें कभी भी यह नहीं सिखाया जाता कि अच्छे से बिहेव कैसे किया जाता है।

इसलिए अपनी morality को प्रैक्टिस करने के लिए आप एक ऐसी कम्यूनिटी का पार्ट बन सकते हो, जिसमें आपको कई fixed रूल्स को फॉलो करना होगा। बहुत सारे रूल्स हमें सोसाइटी भी देती है और बाकी रूल्स हम फिलॉसफी, रिलीजन या किसी ऐसे सर्कल में ढूंढ सकते हैं जिसके मेम्बर्स हमारे जैसे ही बिलीव शेयर करते हैं जितना आप अपनी वैल्यूज को क्लियरली डिफाइन करोगे और उन्हें फॉलो करोगे उतना ही आप फिजिकली और साइकोलॉजिकल भी healthy रहोगे।

Chapter 9 – Divinity with or without God

चाहे हम इंसानों की साइकोलॉजी को स्टडी करें या फिर डायरेक्टली रिलिजन को स्टडी करें यह बात तो क्लियर है कि भगवान या एक भगवान जैसा आइडियल हमारी जिंदगी में बहुत जरूरी होता है चाहे आप एक आस्तिक हो या फिर एक नास्तिक हो।

हमारी माइंड में एक मीटर होता है जो हमें बताता है कि एक चीज कितनी पवित्र या फिर अपवित्र है। हमारे past के हर कल्चर के पास किसी न किसी तरह का रिलिजन जरूर होता था क्योंकि रिलीजियस experiences जैसे रात में तारों से भरा आसमान देखना या फिर काफी खूबसूरत आर्किटेक्चर को हैरानी के साथ अप्रीशिएट करना हमें ज्यादा हैपी और फुलफिल फील कराता है। हमें ऐसा लगता है कि ये ब्यूटी हमें हमारी रोज की डल रियलिटी से ऊपर उठा रही है और तभी हमें या तो इन एक्सपीरियंस को डायरेक्टली रिलिजस प्रैक्टिसेज में ढूंढना चाहिए या फिर आर्ट और नेचर जैसी चीजों में।

 Chapter 10 – Happiness comes from between

इस चैप्टर में जॉनथन ने लाइफ का मीनिंग डिस्कस किया है और बताया है कि जिंदगी का पर्पस होना काफी अलग है जिंदगी में पर्पस होने से।  दो मेन चीजें जो हमारी जिंदगी में पर्पस add करती है वो है प्यार और काम।

यानी आपने अपनी जिंदगी उन लोगों के साथ शेयर करनी है जिनकी आप केयर करते हो और अपने काम में मीनिंग ढूंढने के लिए ये पक्का करो कि आप सिर्फ उन्हीं कामों में हाथ डालो जो आपको अपनी पोटेंशियल को यूज करने का मौका देते हैं और आपकी वैल्यूज के साथ अलाइन करते हैं।

जैसे एक स्टडी में देखा गया कि जो हॉस्पिटल में काम करने वाले क्लीनर यह मानते थे कि वो उस टीम का हिस्सा है जो लोगों की जान बचाती है, वो cleaners ज्यादा खुश थे बजाय उन क्लीनर्स के जो अपने काम को गंदा और यूजलेस समझते थे।

Friends ये था article (The happiness hypothesis book summary in hindi) हमे उम्मीद है आपको यहा पसंद आ होगा हमे comment मे हमे अपने विचार जरूर बताये।

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