अपने व्यक्तित्व के बारे मे ये 8 मनोवैज्ञानिक तथ्य नहीं जानते होंगे आप

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एक इन्सान का व्यक्तित्व उसके व्यवहार व इमोशनल पैटर्न्स और उसके खयालों के बारे में बताती है और किस तरह से हम अपनी रोज लाइफ जीते हैं और हर स्थिति में कैसे रिएक्ट करते हैं ये भी हमारा व्यक्तित्व  ही तय करता है। इसलिए इस लेख में हम व्यक्तित्व के रहस्य को और गहराई में समझेंगे व्यक्तित्व के बारे मे 8 मनोवैज्ञानिक तथ्यों की मदद से।

वतक्तित्व के बारे मे 8 मनोवैज्ञानिक तथ्य

 1. Personality changes with age

हमारा व्यक्तित्व हमारी बायोलॉजी से बहुत ज्यादा influence होता है और जैसे जैसे हमारे अंदर बायोलॉजिकल परिवर्तन आते है वैसे वैसे ही उसका असर हमारी personality और हमारे व्यवहार में दिखने लगता है।

जब हम जवान होते हैं तब हम नैचुरली ज्यादा आलसी liberal, न्यूरिटिक और डिसाग्रेबल होते हैं। यानी हम उतना काम नहीं करते , लोगों से ढंग से बात नहीं करते हमें एंजाइटी ज्यादा होती है और हम ज्यादा खुले विचारों के होते हैं।

लेकिन जैसे जैसे हमारी उम्र बढ़ती है और हम दुनिया का अनुुभव इकठ्ठा करने लगते हैं तब हम खुद ब खुद शांत, मेहनती, स्टेबल और अनुशाासित बनने लगते हैं।

यही करण है कि जो बूढ़े लोग उम्र बढ़ने के बाद भी खुश, कंजर्वेटिव और दयालु नहीं बनते वो अपने बचपन या जवानी में ही जी रहे होते हैं, उन्होंने अपने अनुभवों से ज्यादा कुछ सीखा भी नहीं होता। वरना ये समझ कि दूसरे लोगों को हर्ट करने या उनसे बदला लेने का कोई फायदा नहीं होता और हमें कई रूल्स को फॉलो करना चाहिए या को कई लोगों से जुदा होने दिल टूटने और खुद की suffring को ऑब्जर्व करने से ही अपने आप आ जाती है।

 2. Active love life create mental stability

हम यह जानते हैं कि अच्छे रिश्ते हमारे मानसिक स्वास्थ के लिए कितने ज़रूरी होते हैं। जिस वजह से इसका हमारे व्यक्तित्व पर भी बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है।

क्यूंकि ये देखा गया है कि जो लोग बचपन से ही चिड़चिड़े या फिर चिंता करने वाले होते हैं वो भी जब प्यार में होते हैं तब उनके दिमाग में मौजूद चिंता करने वाले हिस्से शांत हो जाते हैं।

प्यार लोगों को उनकी गलतियों से बाहर लाता है ओर जीवन के प्रति सकरात्मक नज़रिया देता है।

अगर आप भी नैचुरली ज्यादा न्यूरोटिक हो और आपके लिए  डिप्रेस्ड,  anxious इरिटेट और insecure feel करना रोज की ही बात है तो ये देखो कि क्या आपकी लाइफ में आपको पर्याप्त प्यार मिल रहा है या नहीं।

क्योंकि कई बार हमें ये याद दिलाने के लिए कि हम खुद को प्यार करने और रिस्पेक्ट करने के लायक हैं हमें एक दूसरे इन्सान से इस बात का प्रूफ चाहिए।

 3. There are 5 main personality traits

इतिहास में वैज्ञानिको ने कई personality models बनाए और उन्हें फिर लाइफ में उपयोग करने और लोगों को समझने के लिए टेस्ट करा। ये बहस बहुत पुरानी है कि टोटल कितनी personality exist करते हैं।

शुरुवाती रिसर्चर्स जैसे  Gorden Alloport ने सजेस्ट किया था कि टोटल 4 हजार अलग personality traits है जबकि ब्रिटिश साइकॉलजिस्ट रेमंड कैटल ने बोला था कि 16 personality types है।

लेकिन अब तक जिस personality model को सबसे सॉलिड और रिलायबल माना गया है वो है 5 फैक्टर पर्सनालिटी मॉडल जिसमें 5 main personality traits होते हैं ।

  • penness – जो जुड़ा है आपकी creativity से
  •  Conciousness – जो है आपका डिसिप्लिन और मेहनत करने की कपैसिटी।
  • Extraverson – यानी आपको लोगों के बीच रहना कितना पसंद या नापसंद है।
  • Agreeableness  यानी आप कितने दयालू और लविंग हों।
  •  Neorotisism-  जो जुड़ा है आपकी इमोशनल स्टेबिलिटी से।

हर इनसान की personality इन traits के अलग अलग तरह के कॉम्बिनेशन से मिलकर बनी होती है।

  4. Personlity are mostly stable

जहा एक हद तक personality age के साथ खुद नैचुरली बदलती है। वहीं अगर आप ये चाहो कि आप खुद अपनी मर्जी से अपनी पर्सनैलिटी को मोड़ें तो ये काम बहुत मुश्किल होता है। personality पर बेस्ड लॉन्ग टर्म स्टडीज बताती हैं कि हमारी पर्सनैलिटी का एसेंस जो है वो हमारी पूरी जिंदगी स्टेबल रहता है। यानी अगर आप इंट्रोवर्ट हों तो आप बहुत हाथ पैर मारकर प्रैक्टिस कर करके थोड़ा बहुत exyroverson तो डेवलप कर सकते हो, लेकिन दिन के आखिर में अगर आपसे ये पूछा जाए कि आपको लोगों के बीच रहना या फिर अकेले समय बिताना क्या ज्यादा अच्छा लगता है तो चांसेस हैं कि आप दूसरे ऑप्शन को ही चूज करोगे क्योंकि आप दिल से तो इंट्रोवर्ट ही हो।

जो चीज पॉसिबल है वो है अपनी लाइफ एक्सपीरिएंस को स्ट्रेच करना। अगर आप बहुत ज्यादा टेंशन लेते हो तो ये संभव है कि खुद पर काम करके और अपने दिमाग को सिर्फ पॉजिटिविटी फीड करके आप अपनी टेंशन से एक हद तक छुटकारा पा सकते हो। अभी तक personality को बदलने के लिए सिर्फ दो तरीके ही सबसे ज्यादा इफेक्टिव पाए गए हैं।

पहला है micro routine बनाना और खुद को अपने प्रेजेंट पर्सनैलिटी टेस्ट के ऑपोजिट trait से एक्सपोज करना। यानी अगर आप एक एक्सपर्ट हो तो अकेले रहने की प्रैक्टिस करना, इंट्रोवर्ट हो तो सोशल होने की अगर आप लेजी हो तो डिसिप्लिन बिल्ड करने के लिए रूटीन बनाना और अगर आप बहुत ज्यादा नाइस हो तो खुद के अंदर की डार्कनेस को ढूंढना।

दूसरा तरीका है खुद को अपनी इस लिमिटेड आइडेंटिटी से डिक्टेच ही कर लेना। क्योंकि जो जो इनसान अपनी conciusness ने के एक हायर लेवल पर पहुंचा है उसका यही कहना है कि हम अपनी पर्सनैलिटी सिर्फ तभी बदलने में असक्षम रहते हैं जब तक हम खुद को सिर्फ अपनी personality से ही आइडेंटिफाई करते हैं।

अगर आप यह समझ कर अपनी पर्सनालिटी से थोड़ा deattach हो जाओ की आप  इंट्रोवर्ट exotrovert या एग्रीएबल डिसाग्रेबल  नहीं बल्कि ये सब तो आपके मन में बिठाए गए  थॉट्स है।  तो इस अंडरस्टैंडिंग से आप सिर्फ अपनी personality को psychological  लेवल पर ही नहीं बल्कि अब biological लेवल पर जाकर भी उसे बदल सकते हो।

इसलिए अपनी personality को मास्टर कहने के लिए या तो अपने अपोजिट ट्रेट्स को प्रैक्टिस करें या फिर सीधा इस personality से अटैचमेंट ही तोड़ दो और खुद को हर सिचुएशन के अकॉर्डिंग अडॉप्ट करने के लायक बना दो।

 5. Last born is usually lazier

हमारा बचपन हमारी personality को यह shap करने में सबसे ज्यादा कॉन्ट्रिब्यूशन देता है। आपने जरूर सुना होगा कि जो बच्चा सबसे पहले पैदा होता है वो अपने छोटे भाई बहनों से ज्यादा बौंसी और रिस्पॉन्सिबल होता है जबकि आखिर में पैदा होने वाला बच्चा ज्यादा ईरिस्पॉन्सिबल और इंपलसिव होता है।

Science बताती है कि इस बात में बहुत सच्चाई है। आप अपने घर के अकेले बच्चे थे या फिर आप बड़े या छोटे भाई बहन थे इसका प्रभाव आपकी बातों, थिंकिंग आपके दोस्तों का टाइप, पार्टनर का टाइम और आपके पसंद के खाने पर भी पड़ता है।

6. Compassmate people have more sex

2016 में पब्लिश हुई एक स्टडी में जब अलग अलग personality को उनकी sexual फ्रीक्वेंसी के साथ कंपेयर किया गया तब उसमें एक पैटर्न निकलकर आया कि जो लोग उन लोगों की भी मदद करते हैं जो उनके लिए अनजान हैं उन्हें ज्यादा रिप्रोडक्टिव ऑपर्च्युनिटी मिलती हैं।

इसके पीछे की evolutionary psychology बोलती है कि ऑल्टरनेटिव बिहेवियर यानी दूसरों की मदद करना बाकी लोगों तक एक सिग्नल भेजता है कि अगर आप अनजान लोगों की मदद करने के भी काबिल हो तो इसका मतलब आपके पास खुद रिसोर्सेज की कमी नहीं होगी। यही सिग्नल एक person को ज्यादा डिजायरेबल बनाता है।

इसी रिसर्च में ये भी पता चला कि जो लोग ज्यादा चैरिटी करते हैं वो खुद ब खुद दूसरों के लिए ज्यादा अट्रैक्टिव बन जाते हैं।  ये ट्रेटस स्पेशली कॉमन है मेल्स के के बीच। यानी अगर एक मेल ज्यादा चैरिटेबल है और वो दूसरों की मदद करता है तो चांसेस हैं कि उसकी personality का यही हिस्सा उसे ज्यादा डिज़ाइरीबल बनाता है जिस वजह से उसे ज्यादा सेक्शुअल अपॉच्र्युनिटीज मिलती हैं।

  7. Your personlity decide what you study

2015 में हुई एक स्टडी में पता लगा कि जो लोग आर्ट को चूज करते हैं वो ज्यादा मूडी होते हैं। साइकॉलजी मेजर्स यूज करने वाले openness traits में हाई स्कोर करते हैं , law या इकनॉमिक्स स्टडी करने वालों पर ज्यादा विश्वास नहीं करा जा सकता और वो कम एग्रीबल होते हैं और मेडिसिन में जाने वाले लोग ज्यादा कॉन्शियस यानी डिसिप्लिन होते हैं।

यही रीजन है कि क्यू जो इंसान अपनी पर्सनैलिटी के अकॉर्डिंग अपना करियर चूज नहीं करता उसे पढ़ने और काम करने में ज्यादा सैटिस्फैक्शन नहीं मिलती और वो अच्छी कमाई करने के बाद भी अंदर से empty feel करता है।

8. Personlity influence politics

ये फैक्ट आपके लिए शॉकिंग नहीं होना चाहिए क्योंकि जहां हमारी personality हमारी थिंकिंग को influence करती है वहीं ये जाहिर है कि उसका असर इस बात पर भी जरूर पड़ेगा कि हम पॉलिटिकली किस साइड या पार्टी को सपोर्ट करते हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो में हुई एक स्टडी बताती है कि जो लोग खुद को कंजर्वेटिव बोलते हैं वो usaly पर्सनालिटी trait conciousness में हाई स्कोर करते हैं और जो लोग खुद को लिबरल बोलते हैं वो ओपननेस और अग्रिएबलनेस में हाई स्कोर करते हैं। इसी वजह से कंजर्वेटिव लोग हमेशा ज्यादा ऑर्डरली होते हैं लेकिन लिबरल लोग क्रिएटिव होते है।

जिन लोगों की पर्सनैलिटी काफी बैलेंस्ड होती है यानी वो कॉन्शियस भी होते हैं क्रिएटिव भी और एग्रीएबल भी वो पॉलिटिकल स्पेक्ट्रम के सेंटर के आसपास होते हैं। ये अंडरस्टैंडिंग बहुत जरूरी है हमें यह समझाने में कि जो इनसान पॉलिटिकली आपसे अग्रि नहीं करता उसका मतलब ये नहीं है कि वो बेवकूफ है बल्कि वो आपसे अलग इसलिए सोचता है जिसमें कोई उसकी पर्सनैलिटी अलग है और उसकी पर्सनैलिटी अलग इसलिए है क्योंकि उसके जींस से अलग है और वो एक यूनीक हालात में पला बढ़ा है ।

जिस तरह से हर personlity traits किसी न किसी पर्पस को सर्व करने के लिए इवोल्व हुआ होता है और हम उन्हें अच्छा या बुरा नहीं बोल सकते वैसे ही पॉलिटिक्स होती है। आप चाहे एक पार्टी की पॉलिसीज या उनके view से एग्री करो या ना करें लेकिन उनका ओपिनियन दुनिया में बैलेंस बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी है।

तो दोस्तों ये थे 8 psychological facts about personlity in hindi. हमे उम्मीद है यह लेख आपको पसंद आया होगा।

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